Hindi Poem: वहीँ से खुलता है प्रभु मंदिर का द्वार

Last Updated

“साँझ गहरा गयी है

चांदनी छिटक कर चहुँ ओर छा गयी है

विलम्ब न कर, चल शरण ले

जागकर, अपने हाथों में प्रभु के चरण ले

पथ है विकट

घना है वन

पग पग बिछे हैं कांटे

न घटेगी पीड़ा तेरी किसी के भी बांटे

मत हो भ्रमित

चल, वो संकरी राह ले

उस उपेक्षित सी अँधेरी गुफा की थाह ले

वहीँ है तेरा सिरजनहार

वहीँ से खुलता है प्रभु मंदिर का द्वार।”

-by Avdhesh Tondak

Read more:

Hindi Poem on Meera

Trust Quotes
Planning to End Your Life? Sorry, But You Can't Die

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Avdhesh Tondak is a blogger and voice actor. He writes for students, professionals, and seekers. Subscribe to receive his new articles by email.