Are You a Nationalist?

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The Indian prime minister Mr Narendra Modi’s statement “I am a Hindu nationalist” had created a lot of controversies once. People had started asking each other, “Are you a nationalist? What kind?”

TV news channels conducted debates after debates about nationalism, and still, nobody can answer who is a nationalist and who’s not.

Let’s keep the politics behind nationalism aside. The fact is that most of us take pride in calling ourselves, nationalists. But have you ever thought if you really are a nationalist, or just pretending to be one?

“What do you mean by ‘pretending to be one?’ Are you questioning my nationalism?”

Absolutely!



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Is Honking a Necessity?

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My father often complains I don’t blow horn in streets.

Well, first of all, roads in residential areas are not meant for vehicles, they are for pedestrians. It’s a miracle that you’re allowed to ride a bike or drive a car in the streets. I’d say that it’s a privilege.

Yes, I also used to honk until recently, but then I overcome that nasty habit.

It goes back to 1992.

One of my friends taught me to ride a scooter.

It took him only a couple of hours to make me understand how things work. After that, I was supposed to practise as much as I could.



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How Loud are Your Religious Sentiments?

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My mother once asked me:

“How about organising a ‘Jagaran’?” (a musical night honouring Goddess Durga).

“Well, that’s a beautiful idea, but loudspeakers are not allowed post 10 pm, so, I shall have to disconnect them as soon as the clock hits 10. The musical group can sing the “Bhajans” and “Bhents” the whole night but without loudspeakers.”

“What’s the point of a Jagaran without loudspeakers?” I could sense the disappointment in her voice.

That was a long time back, and since then, she has never discussed Jagarans (at least not with me).

You tell me – what’s a Jagaran all about?



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क्या मानवता सबसे बड़ा धर्म है?

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You know what, इस दुनिया की सबसे बड़ी समस्या क्या है? हर तथाकथित धर्म कहता है कि वो सबसे बड़ा धर्म है-उसका यही बड़प्पन उसे दूसरों की तुलना में विशेष बनाता है। वो गर्व से फूला नहीं समाता…कि आहा-हा, ऐसा धर्म तो अब से पहले कभी हुआ ही नहीं।

लेकिन अगर आप थोडा ध्यान से देखें तो यही मानसिकता विरोध का, दमन का और अंध-उन्माद का मूल कारण है। वैसे अगर इस मानसिकता की थोड़ी सी जांच करनी हो तो अपने मन में थोडा झाँक लेना उचित होगा।

कल तक तिलक, आज टोपी?

सत्य तो ये है कि मनुष्य का मन ये मानने को तैयार ही नहीं होता कि कोई उससे श्रेष्ठ भी हो सकता है। कल तक जो मूर्तिपूजा की महिमा का वर्णन करते नहीं अघाता था, आज वो ‘टोपी’ पहनकर मूर्तिपूजा का विरोध करता नहीं अघाता। कल तक ‘वो’ धर्म बड़ा था, आज ‘ये’ धर्म बड़ा हो गया।

अगर आप ठीक से देखें तो वस्तुतः धर्म से कोई लेना देना ही नहीं है। ‘वो’ धर्म कल तक बड़ा इसलिए था क्योंकि उसके साथ मैं जुड़ा हुआ था, अब आज तो मैं उस धर्म के साथ हूँ नहीं तो अब वो धर्म बड़ा कैसे हो सकता है?



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Was it a Mistake to elect NARENDRA MODI as PM (क्या मोदी जी को प्रधानमंत्री चुनना एक भूल थी?)

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Narendra Modi - The Indian Prime Minister Wearing a Saffron Kurta and Rudraksh Mala During a Visit to The Pashupatinath Temple in Nepal

इतनी बड़ी भूल कैसे हुई?

२०१४ के लोकसभा चुनावों में भारतवर्ष की जनता से एक बहुत बड़ी भूल हुई – हमने श्री नरेन्द्र मोदी जी को भारतवर्ष का प्रधानमंत्री बना दिया। और अब हम पछता रहे हैं। नित्य हाथ मलते हैं, नित्य प्रभु से क्षमा मांगते हैं अपने उस अपराध के लिए जिसने देश को विनाश के पथ पर जाने के लिए विवश कर दिया है।

हम तो कांग्रेस के शासनकाल में 2G, 3G, जीजाG, कोयला घोटाला, और भी ऐसी न जाने कितनी ही विकास योजनाओं के माध्यम से देश को विकास के नवीन शिखरों को छूता हुआ देख रहे थे, किन्तु मोदी जी ने तो आते ही घोटालों रुपी सभी विकास योजनाओ पर अंकुश लगा दिय। संभवतः मोदी जी को ये ज्ञात नहीं कि भारत में हो रहे घोटालों पर अंकुश लगने से देश की जनता कितनी आहत हुई है।

‘सबका साथ, सबका विकास?’

ऐसा प्रतीत होता है कि नरेन्द्र मोदी जी सत्ता-मद में चूर हो जनता को अशक्त और हीन समझ रहे हैं, किन्तु ये भ्रम इन्हें बहुत महंगा पड़ने वाला है। विकास के नाम पर वोट मांगी गयी, ‘सबका साथ सबका विकास’ करने की बातें कही गयीं किन्तु सत्ता में आते ही सब भूल गए। केवल जनता की भलाई सोचने लगने, भ्रष्टाचारियों के विकास का क्या हुआ?



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