Hindi Poem on Courage: चुनौती

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“त्वरा से बढे चलो,

हृदय है तुम्हारा निष्कपट, फिर क्यूँ है झिझक?

धूल भरा है मार्ग, शायद कांटे भी हों।

पथ ही जो ठहरा…बिना घाव पाए गुज़र जाओ जिससे वो राह कैसी?

परीक्षा है यही तो, यही है कसौटी।

शायद मार्ग में मिलें गिद्ध, और नोच डालें बोटी-बोटी।

फिर भी बढे चलो..

क्यों?

क्योंकि यही है आत्मरंजन

अग्नि से गुज़रकर ही स्वर्ण, कहलाता है कुंदन।।”

Appreciating Love
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