Hindi Poem on Meera: अगर तुम न होते

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Hindi Poem on Meera
(Photo courtesy: cutekanhaji.blogspot.ae)

“किसे कहती मैं साजन

और नयन मेरे व्याकुल

किसके स्वप्न संजोते

अगर तुम न होते।”

“किसकी बाट जोहती मैं

किससे रूठती मनुहार करती

किसके लिए मैं सोलह श्रृंगार करती

अगर तुम न होते।”

 

“किसके लिए नृत्य करती गलियों में

क्यों मैं घूँघर बजाती

क्यों नैनों से नीर बहाती

अगर तुम न होते।”

 

“क्यों त्यागती लज्जाभूषण

क्यों मस्त हो खिलखिलाती

किसकी सुरति में मान मर्यादा विस्मृत कर जाती

अगर तुम न होते।”

 

“पीती किसके लिए विष का प्याला

क्यों काँटों की सेज पर सोती

किसकी मोहिनी मूरत पर निछावर होती

अगर तुम न होते।”

 

“किसके लिए रमाती धूनी

किसे सांवरा कहती

दुनिया सारी फिर क्यों मुझे बावरी कहती

अगर तुम न होते।”

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