Hindi Poems by Avdhesh Tondak

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चुनौती

“त्वरा से बढे चलो,

हृदय है तुम्हारा निष्कपट, फिर क्यूँ है झिझक?

धूल भरा है मार्ग, शायद कांटे भी हों।

पथ ही जो ठहरा…बिना घाव पाए गुज़र जाओ जिससे वो राह कैसी?

परीक्षा है यही तो, यही है कसौटी।

शायद मार्ग में मिलें गिद्ध, और नोच डालें बोटी-बोटी।

फिर भी बढे चलो..

क्यों?

क्योंकि यही है आत्मरंजन

अग्नि से गुज़रकर ही स्वर्ण, कहलाता है कुंदन।।”

 

चल चला चल

“माटी की इस देह का लेकर सहारा

संशय, उलझन, भ्रम-सब को कर किनारा

गर्व से अनजान पथ पर तू बढ़ा चल

पगले चल चला चल।।

जीवन बीता जा रहा है

सब कुछ रीता जा रहा है

पुरातन पात झर गए हैं

फूल टहनी से छिटककर गिर गए हैं

नित नवीन काव्य का सृजन कर-चला चल

पगले चल चला चल।।

साँझ गहराने को है

कालिमा छाने को है

झींगुर स्वर करने लगे हैं

पंछी कुछ डरने लगे हैं

पर तू न घबरा रात से – बस बढ़ा चल

चल चला चल

पगले चल चला चल।।”

 

वहीँ से खुलता है प्रभु मंदिर का द्वार

“साँझ गहरा गयी है

चांदनी छिटक कर चहुँ ओर छा गयी है

विलम्ब न कर, चल शरण ले

जागकर, अपने हाथों में प्रभु के चरण ले

पथ है विकट

घना है वन

पग पग बिछे हैं कांटे

न घटेगी पीड़ा तेरी किसी के भी बांटे

मत हो भ्रमित

चल, वो संकरी राह ले

उस उपेक्षित सी अँधेरी गुफा की थाह ले

वहीँ है तेरा सिरजनहार

वहीँ से खुलता है प्रभु मंदिर का द्वार।”

 

अगर तुम न होते

Hindi Poem on Meera
(Photo courtesy: cutekanhaji.blogspot.ae)

“किसे कहती मैं साजन

और नयन मेरे व्याकुल

किसके स्वप्न संजोते

अगर तुम न होते।”

“किसकी बाट जोहती मैं

किससे रूठती मनुहार करती

किसके लिए मैं सोलह श्रृंगार करती

अगर तुम न होते।”

 

“किसके लिए नृत्य करती गलियों में

क्यों मैं घूँघर बजाती

क्यों नैनों से नीर बहाती

अगर तुम न होते।”

 

“क्यों त्यागती लज्जाभूषण

क्यों मस्त हो खिलखिलाती

किसकी सुरति में मान मर्यादा विस्मृत कर जाती

अगर तुम न होते।”

 

“पीती किसके लिए विष का प्याला

क्यों काँटों की सेज पर सोती

किसकी मोहिनी मूरत पर निछावर होती

अगर तुम न होते।”

 

“किसके लिए रमाती धूनी

किसे सांवरा कहती

दुनिया सारी फिर क्यों मुझे बावरी कहती

अगर तुम न होते।”

 

जब तक क्षितिज न मिल जाये

“आओ,

मिलकर प्रकाशमान बनाएं इस धरा को

खिलाएं कुसुम प्रेम के

सागर के पार जायें

हो व्याकुल उत्कंठा से, नव चेतना के गीत गायें

बस बढ़ते ही जायें

जब तक क्षितिज न मिल जाये।”

Hindi Poem on Winter Season: माँ चौके में
No One is Coming to Rescue You

Avdhesh Tondak is a blogger on a mission: to cut the crap and give the readers what they want (and deserve)—personal development articles in plain English. Connect with him on facebook and twitter.