क्या मानवता सबसे बड़ा धर्म है?

You know what, इस दुनिया की सबसे बड़ी समस्या क्या है? हर तथाकथित धर्म कहता है कि वो सबसे बड़ा धर्म है-उसका यही बड़प्पन उसे दूसरों की तुलना में विशेष बनाता है। वो गर्व से फूला नहीं समाता…कि आहा-हा, ऐसा धर्म तो अब से पहले कभी हुआ ही नहीं।

लेकिन अगर आप थोडा ध्यान से देखें तो यही मानसिकता विरोध का, दमन का और अंध-उन्माद का मूल कारण है। वैसे अगर इस मानसिकता की थोड़ी सी जांच करनी हो तो अपने मन में थोडा झाँक लेना उचित होगा।

सत्य तो ये है कि मनुष्य का मन ये मानने को तैयार ही नहीं होता कि कोई उससे श्रेष्ठ भी हो सकता है। कल तक जो मूर्तिपूजा की महिमा का वर्णन करते नहीं अघाता था, आज वो ‘टोपी’ पहनकर मूर्तिपूजा का विरोध करता नहीं अघाता। कल तक ‘वो’ धर्म बड़ा था, आज ‘ये’ धर्म बड़ा हो गया।

अगर आप ठीक से देखें तो वस्तुतः धर्म से कोई लेना देना ही नहीं है। ‘वो’ धर्म कल तक बड़ा इसलिए था क्योंकि उसके साथ मैं जुड़ा हुआ था, अब आज तो मैं उस धर्म के साथ हूँ नहीं तो अब वो धर्म बड़ा कैसे हो सकता है? अब तो ये धर्म बड़ा है – ये,जिससे मैं currently जुड़ा हुआ हूँ-बस, यहीं से प्रारंभ हो जाता है मूढ़ताओं का दुष्चक्र!

और कुछ लोग तो इससे भी आगे चले गए हैं-वो कहते हैं कि ये धर्म, वो धर्म, कोई बड़ा नहीं है, अरे सबसे बड़ा धर्म तो ‘मानवता’ है, मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं।

बात बड़ी मीठी सी लगती है, बड़ी सुन्दर, बड़ी प्यारी, कि वाह! क्या बात कही है। पर भाई ज़रा आँखें खोलकर तो देखो-क्या आप फिर से वही मूढ़ता नहीं दोहरा रहे हैं? परसों तक आप ‘उस’ धर्म को बड़ा मानते थे, कल ‘इस’ धर्म को बड़ा मानने लगे और जब समस्या हल नहीं हुई – नारे लगते रहे, लोग टीवी पर डिबेट पर डिबेट पर डिबेट करते रहे, नेतागण अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते रहे तो अब आप कहने लगे हैं कि अरे छोडो ये सब बातें-कोई धर्म बड़ा नहीं है-मानवता है सबसे बड़ा धर्म।

पर एक बात notice की आपने? ‘बड़ा’ का concept आपने अब भी नहीं छोड़ा।

और मज़े की बात ये है कि आपके साथ बहुत से लोग facebook पर, twitter पर और न जाने कहाँ-कहाँ सुर में सुर मिलाते हैं कि हाँ भाई, ये बात तो सच है-सबसे बड़ा धर्म तो मानवता ही है! मतलब पेड़ के पत्ते तोड़ दिए, टहनियां भी काट दीं, बस जड़ को पानी देना जारी रखा- ‘बड़ा’ का concept कल भी था और आज भी है, हाँ बस नाम बदल गया।

क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि सत्य कुछ और ही है-असल में आप जिस धर्म के साथ जुड़ जाना चाहते हैं उसी को बड़ा मानने और मनवाने के  षड़यंत्र शुरू कर देते हैं।

अगर सच में इस पृथ्वी पर धर्म का अवतरण होना है तो उसकी संभावनाएं तभी बन सकती हैं जब ‘सबसे बड़ा धर्म’- ये terminology पूरी तरह से विदा हो जाये-आपके मन से!

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Avdhesh Tondak is a blogger & voice actor from Western Uttar Pradesh, currently living in New Delhi. He writes personality development articles for young people (students, and young professionals) to help them overcome self-growth challenges. Subscribe to receive his new articles by email.