Was it a Mistake to elect NARENDRA MODI as PM (क्या मोदी जी को प्रधानमंत्री चुनना एक भूल थी?)

Last Updated

Narendra Modi - The Indian Prime Minister Wearing a Saffron Kurta and Rudraksh Mala During a Visit to The Pashupatinath Temple in Nepal

इतनी बड़ी भूल कैसे हुई?

२०१४ के लोकसभा चुनावों में भारतवर्ष की जनता से एक बहुत बड़ी भूल हुई – हमने श्री नरेन्द्र मोदी जी को भारतवर्ष का प्रधानमंत्री बना दिया। और अब हम पछता रहे हैं। नित्य हाथ मलते हैं, नित्य प्रभु से क्षमा मांगते हैं अपने उस अपराध के लिए जिसने देश को विनाश के पथ पर जाने के लिए विवश कर दिया है।

हम तो कांग्रेस के शासनकाल में 2G, 3G, जीजाG, कोयला घोटाला, और भी ऐसी न जाने कितनी ही विकास योजनाओं के माध्यम से देश को विकास के नवीन शिखरों को छूता हुआ देख रहे थे, किन्तु मोदी जी ने तो आते ही घोटालों रुपी सभी विकास योजनाओ पर अंकुश लगा दिय। संभवतः मोदी जी को ये ज्ञात नहीं कि भारत में हो रहे घोटालों पर अंकुश लगने से देश की जनता कितनी आहत हुई है।

‘सबका साथ, सबका विकास?’

ऐसा प्रतीत होता है कि नरेन्द्र मोदी जी सत्ता-मद में चूर हो जनता को अशक्त और हीन समझ रहे हैं, किन्तु ये भ्रम इन्हें बहुत महंगा पड़ने वाला है। विकास के नाम पर वोट मांगी गयी, ‘सबका साथ सबका विकास’ करने की बातें कही गयीं किन्तु सत्ता में आते ही सब भूल गए। केवल जनता की भलाई सोचने लगने, भ्रष्टाचारियों के विकास का क्या हुआ? क्या वो लोग “सब” में नहीं आते? ये तो घोर अन्याय है। कितने शोक का विषय है कि अब तक ऐसा एक भी घोटाला सामने नहीं आया जिस पर हम गर्व कर सकें। क्या इसीलिए वोट दिया था हमने मोदीजी को?

भारतवर्ष के ‘महानतम प्रधानमंत्री’ और नारी-सम्मान की परंपरा

हमें आज भी स्मरण हैं कांग्रेस शासनकाल के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी। ओह! क्या व्यक्तित्व था उनका, इतने लम्बे-लम्बे कदमों से चलते थे कि लगता था कोई महापुरुष चला आ रहा है, उनका हाथ उपर उठा-उठाकर बात करना तो हम भारतवासियों के स्वप्नों के भारत का निर्माण करने का संकेत होता था। और जब वो ‘बोलते’ थे तो बस पूछो ही मत। अरे, ऐसे ओजस्वी वक्ता तो धरा पर सदियों में अवतरित होते हैं।

आपने ध्यान दिया, मोदी जी नारी-सम्मान की बहुत बातें करते हैं, किन्तु उनकी बातें स्वांग जैसी प्रतीत होती हैं। नारी का सम्मान कैसे किया जाता है ये चरितार्थ करके तो श्री मनमोहन सिंह जी ने दिखाया था। अपने पूरे कार्यकाल में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया खान जी के आदेशों का अक्षरशः पालन किया, एक वीर योद्धा की भांति वे उसी पथ पर चलते रहे जिसका उन्हें निर्देश दिया गया –  10, जनपथ से। नारी-सम्मान और प्रेम की भावना से ओत-प्रोत ऐसा व्यक्तित्व है मनमोहन सिंह जी का, और हो भी क्यूँ न, वो एक ऐसी पार्टी से आते हैं जिसमे नारी-सम्मान की सनातन परंपरा रही है।

कांग्रेस में ‘नारी-सम्मान’ की परंपरा

इससे पूर्व कि हम कांग्रेस में नारी-सम्मान की परंपरा की बात करें, एक दृष्टि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरु जी के देश प्रेम पर डालते हैं। कुछ सज्जनों का मत है कि वो विदेशी आक्रान्ताओं – मुग़लों के वंशज थे। और तो और उनका नाम पंडित नेहरु नहीं, ‘घियासूद्दीन जवाहर ग़ाज़ी था। उन्हें ये स्वीकार्य नहीं था कि जिस देश को उनके पूर्वजो ने इतने वर्षों तक लूटा, उसे कोई और लूट ले, इसलिए उन्होंने अपने तथाकथित वास्तविक नाम घियासूद्दीन जवाहर ग़ाज़ी को तिलांजलि देकर अपना नाम पंडित नेहरु रख लिया और अनमने मन से भारत का प्रथम प्रधानमंत्री बनना स्वीकार किया।

संभवतः कांग्रेस में नारी-सम्मान की परंपरा का शुभारम्भ करने का श्रेय नेहरु जी को ही जाता है। नेहरु जी महिलाओं का अत्यधिक सम्मान किया करते थे। आज भी कई सोशलमीडिया साइट्स उस गौरवपूर्ण अतीत की साक्षी हैं। इन साइट्स पर नेहरु जी के अनगिनत नारियों के साथ स्नेहपूर्ण चित्र आपको आज भी मिल जायेंगे – किसी युवती का आलिंगन करते हुए, किसी का चुम्बन लेते हुए, तो किसी के साथ स्नेहपूर्वक धूम्रपान करते हुए।

नेहरु जी ने नारी-सम्मान को अपने पूरे जीवन में उतार लिया था, वो नारी-सम्मान की केवल बातें ही नहीं करते थे वरन उसे प्रतिदिन, ‘प्रतिरात्रि’ जीते भी थे।

कुछ सज्जन तो यहाँ तक कहते है कि उनकी मृत्यु AIDS से हुई थी, अब नारी-सम्मान और प्रेम का इससे बड़ा उदाहरण भला और क्या हो सकता है?

किन्तु आप ये न समझें कि नेहरु जी ने नारी-सम्मान की जिस परम्परा का श्रीगणेश किया था वो उनके साथ ही विदा हो गयी, नहीं, वो परंपरा तो आज भी जीवित है। अभी कुछ ही समय पूर्व कांग्रेस के एक नेता जी ने रहस्योद्घाटन किया था कि कांग्रेस में नारियों को टिकट तभी मिलता है जब वो कतिपय पुरुष नेताओं को अपना “सम्मान” करने की पूर्ण स्वतंत्रता दे देती हैं। और एक मोदीजी हैं, हम आजतक किसी सोशलमीडिया साईट पर किसी महिला का सम्मान करते हुए उनका एक भी चित्र नहीं ढूंढ पाए और इस पर भी मोदीजी सोचते हैं कि हम उनकी नारी-सम्मान की बातों में आ जायेंगे?

एक अविस्मरणीय व्यक्तित्व – ‘सोनिया खान’

कांग्रेस की वर्तमान अध्यक्षा सोनिया खान जी के नाम से कौन परिचित नहीं है। उनका अतीत अति कष्टपूर्ण रहा है। एक समय था जब सोनिया खान जी भाग्य के हाथों इतनी विवश थीं कि उन्हें ‘बार’ में नृत्य करना पड़ता था और ‘बार-बार’ लोगों के झूठे बर्तन भी उठाने पड़ते थ। उन्हें उस नर्कतुल्य जीवन से मुक्ति दिलवाई मैमूना बेगम और फ़िरोज़ खान के सुपुत्र श्री राजीव खान जी ने, जो सोनिया जी को प्रेमपूर्वक अपनी अर्धांगिनी बनाकर भारतवर्ष की पुत्रवधू के रूप में ले आये।

सोनिया जी जब से आईं है तब से सबकुछ भूलकर बस भारतवर्ष की सेवा में संलग्न है। उन्होंने भारतवर्ष के विकास के लिए एक के बाद इतने घोटाले करवाए कि आप गिनती भी नहीं कर सकते। ओह! मेरी आँखों से तो कृतज्ञता के अश्रु बहने लगे हैं उनके योगदान को स्मरण करके।

देश को ‘सहिष्णु’ बनाने में किसका योगदान?

“मैमूना बेगम” जिन्हें कुछ लोग इंदिरा के नाम से भी जानते हैं उनका योगदान हम कैसे भूल सकते हैं, जब उन्हें लगने लगा कि कुछ राष्ट्र-प्रेमी तत्व भारतवर्ष की प्रगति में बाधा बन रहे हैं तो उन्होंने अविलम्ब आपातकाल की घोषणा कर दी। राष्ट्रप्रेमियों और विचारकों को कारागार में डलवा दिया, ताकि राष्ट्रनिर्माण के कार्य में कोई बाधा न पड़े।

वो मैमूना बेगम ही थीं जिन्होंने आवश्यकता न होते हुए भी संविधान में संशोधन करवाकर उसमे सेक्युलर और सोशलिस्ट जैसे पवित्र शब्दों को सम्मिलित करवाया ताकि हिन्दुओं का शोषण और “अल्पसंख्यकों” का तुष्टिकरण किया जा सके। ये था भारतवर्ष को सहिष्णु बनाने में उनका योगदान।

सांप्रदायिक सौहार्द?

एक कांग्रेस पार्टी है जिसने देश में सहिष्णुता के एक से बढ़कर एक उदाहरण प्रस्तुत किये, जिसमें पता नहीं कितने व्यक्तियों ने “सांप्रदायिक सौहार्द” की पावन वेदी पर अपने प्राणों की आहुति दे दी, और एक मोदी जी हैं…गुजरात में 2002 के बाद सहिष्णुता की एक भी स्मरण रखने योग्य घटना नहीं, पता नहीं मतदाताओं ने इन्हें क्यों अपना मत दिया? (प्रतीत होता है मतदाताओं की ‘मत’ मारी गयी थी)

अब देखिये ना, हुई भी तो बस ले-देकर दादरी नाम की एक घटना और वो भी असत्य! एक व्यक्तिगत शत्रुता को जानबूझकर सांप्रदायिक सौहार्द का नाम देकर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का एक असफल प्रयास था वो। और तो और, जिन महान शासक माननीय श्री अखिलेश यादव जी के राज्य “पुत्तर प्रदेश” में ये घटना हुई उन्हें इसका श्रेय भी नहीं लेने दिया गया, इसके ठीक उलट, इस नगण्य-सी घटना का श्रेय भी मीडिया ने नरेन्द्र मोदी जी को दे दिया।

अल्पसंख्यक सशक्तिकरण

मोदीजी के “अल्पसंख्यक सशक्तिकरण” के अधिकतर दावों को जनता भ्रमपूर्ण ही मानती है। कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों का जितना सशक्तिकारण किया है उतना तो कोई और सोच भी नहीं सकता। कांग्रेस ने एक समुदाय विशेष को इतना सशक्त कर दिया वो जब चाहे, जहाँ चाहे बम विस्फोट करके अपने “शांतिपूर्ण” धर्म के माध्यम से सांप्रदायिक सौहार्द के एक से बढ़ कर एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकते थे, किन्तु मोदी जी अब तक ऐसा कर पाने में असफल ही प्रतीत हो रहे हैं।

ये कैसी ‘मित्रता?’

मित्रों के बिना कैसा जीवन, और मित्र देशों के बिना कैसा भारत? ये आवश्यक है कि अपने परम मित्र देश पाकिस्तान का उल्लेख किया जाये। जब तक कांग्रेस सत्ता में थी तब तक पाकिस्तान से शांतिदूत बिना किसी व्यवधान के भारतवर्ष में आते-जाते रहे और विश्व के एकमात्र शांतिपूर्ण धर्म की विजय पताका भारतवर्ष में लहराते रहे। एक घटना विशेष रूप से उल्लेखनीय है-मुंबई में हुआ 26/11 का शांतिपूर्ण आक्रमण।

जब तक कांग्रेस का शासन रहा, पाकिस्तान से साथ मित्रता बनी रही, किन्तु जब से मोदीजी आये हैं, स्थिति बिलकुल उलट गयी है, आज यदि पाकिस्तान सीमापार से गोलीबारी करता है तो उसे पूर्व की भांति मित्र की ठिठोली न समझकर हमारी सेना इस तरफ से दुगुनी गोलीबारी करती है जिसके कारण सीमा के उस पर अब तक न जाने कितने पाकिस्तानी शान्तिदूत ७२ हूरों के सानिध्य में जा चुके हैं। क्या यही है मोदीजी की विदेश नीति, जिसमे एक मित्र राष्ट्र के साथ ऐसा अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है?

जनता की व्यथा

मुझे ज्ञात है कि आप भी व्यथित है कि आपने मोदीजी को वोट क्योँ दिया।

  • आपने मोदी जी को प्रधानमंत्री पद हेतु ये सोचकर तो नहीं चुना था कि जिन देशों में आज तक कोई भारतीय प्रधानमंत्री नहीं गया वहां भी पहुंचकर मोदीजी जनता के दोनों हाथ ऊपर करवाके “भारत माता की जय” और “वन्देमातरम” जैसे नारे लगवाएं? अब आप ही बताइए, क्या विदेशी भूमि पर भारतवर्ष को गौरवान्वित करना शोभा देता है?
  • आपने मोदी जी को वोट इसलिए तो नहीं दिया था कि मोदीजी पूरे विश्व से भारत के लिए समर्थन जुटाएं? दुनिया के समृद्ध और विकसित राष्ट्रों को भारतवर्ष में निवेश के लिए तैयार करें और वहां से करोड़ों, अरबों रुपये का निवेश लेकर आयें? नहीं! कदापि नहीं।
  • आपने मोदी जी को वोट इसलिए तो नहीं दिया था कि वो मंत्रियों को नागरिकों की समस्याओं का शीघ्रातिशीघ्र निदान करने का निर्देश दें और माननीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी चलती रेल में एक महिला यात्री को सहायता उपलब्ध करवाएं। और तो और, बस एक tweet करने पर एक यात्री के पिता हेतु चिकित्सकीय सहायता भी उपलब्ध करवा दें, वो भी रेल को दस मिनटों तक रोक कर?

कोई ये न समझे की जनता को कुछ दिखाई नहीं देता, कुछ समझ में नहीं आता, अरे, हम सब समझते हैं। हमे अपनी भूल का पता चल चुका है।

बस अब कुछ ही समय बचा है, इसके पश्चात हम फिर से उन्हीं लोगों को, उसी पार्टी को देश की सत्ता सौंपेंगे जिसके शासन में घोटालों और भ्रष्टाचार की फसल लहलहा सके , “अल्पसंख्यकों” का तुष्टिकरण हो सके और देश में विकास का जो परचम मोदी सरकार के शासन में दिन-प्रतिदिन ऊंचा ही उठता जा रहा है, पुन: रसातल में समाने को आतुर हो जाये।

जय भारतवर्ष!

 

Related:

Why I Will Not Vote for MODI in 2019 (मैं इसलिए 2019 चुनाव में ‘मोदी जी’ को वोट नहीं दूँगा!)

 

Water Shortage in Delhi: Will it End, Ever?
क्या मानवता सबसे बड़ा धर्म है?

Avdhesh Tondak is a blogger and voice actor. He writes for students, professionals, and seekers. Subscribe to receive his new articles by email.